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Wednesday, August 2, 2017

मैं ज़ख्म से नहीं



तूने कद्र जो मेरी की होती   ..... सिर्फ इशारा ही बयाँ करती, 
मैं ज़ख्म से नहीं  .... उसकी टीस से डरा करती हूँ  |

"अन्दर तक "... "अच्छे से "



धीमी सी चाल से कदम रखने वाले  ,
तूने इश्क ऐसा सिखाया   .... जो "अन्दर तक "... "अच्छे से "  तकलीफ दे गया  \

तुम बन गई हो "शराब " महफ़िल में

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तुम बन गई हो  "शराब " महफ़िल में ,
कौन कहता  है कि मैं नहीं तुम में  ?
तुम्हारी शोख सी भोली अदाएं  ,
जाम में घुल गई मदहोश करने  |

तुमने रंगीन बनाया मुझको  ,
हर चाहत में अपना रँग दिखाया मुझको  ,
मैं पी कर "शराब" झूम भी लूं  ,
तब भी तेरा अक्स समाया मुझमे  |

सबकी नज़रों से बचकर जाम अपना भरने लगे ,
हर घूँट में तेरा ही ज़िक्र करने लगे  ,
तुम ज़हर में भी दवा लगती हो  ,
तभी तुमको  "शराब " हमने कहा महफ़िल में  | 

तुम बन गई हो  "शराब " महफ़िल में ,
कौन कहता  है कि मैं नहीं तुम में  ?

याद आ रही है फिर से



याद आ रही है फिर से   .... अपनी दोस्ती की वो पहली मुलाक़ात  ,
जब यूँही किसी रात में  .... संग थे तुम मेरे साथ  ,
अनजान लोगों के  ...... नापाक इरादों से भरी हर बात ,
एक अच्छा सा साथ ....... जिसमे हर पल जान जाने का एहसास | 

हर रेस में निकलती थी   ..... तुम्हे हराने की एक ख्वाइश ,
मगर जीत कर अफ़सोस करती हुई ...... धडकनों  की फरमाइश  ,
मुश्किल ही होगा जहान में  ..... तुमसा और कोई पाना  ,
जिसे इतने करीब आने पर भी आता हो   ..... एक पल में सब भुलाना |


हर अंग में मेरे



हर  अंग में मेरे  .... तुझे बुलाने की चाह थी  ,
तू  बेवफा नहीं  ..... मेरी आबरू का दावेदार  है  |

Thursday, March 9, 2017

महीन मलमल में

महीन मलमल में  ....... महीन सी महक ,
मचलने की वजह बनी  ....... वही महीन सुरमे की लहक ।

हर "सर्फिंग" में मुझे तू नज़र आए

हर "सर्फिंग" में मुझे तू नज़र आए ,
हर "वेबपेज" पर तेरी पिक्स का ख्याल सताए ,
दिल ~ ए ~ उल्फत की बेकरारी को ,
ना हम समझ पाए  ....... ना वो समझ पाए ।