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Thursday, March 9, 2017

महीन मलमल में

महीन मलमल में  ....... महीन सी महक ,
मचलने की वजह बनी  ....... वही महीन सुरमे की लहक ।

हर "सर्फिंग" में मुझे तू नज़र आए

हर "सर्फिंग" में मुझे तू नज़र आए ,
हर "वेबपेज" पर तेरी पिक्स का ख्याल सताए ,
दिल ~ ए ~ उल्फत की बेकरारी को ,
ना हम समझ पाए  ....... ना वो समझ पाए ।

रुला कर हमें कह दिया


रुला कर हमें कह दिया  ...... कि मत हो " Insecure " ,
इतना Love करते हो  ......... फिर क्यूँ करते हो हमें कमज़ोर ?

मज़े में मज़ा

मज़े में मज़ा  ........ जो मज़ा बनके निकले ,
खुदी से जो खुदा  ....... खुदा के डर से निकले ,
गर्म साँसों में साँसों की  ........ साँस महक जाए ,
इश्क़ में दीवाने  ........ इश्क़ के ऐसे जूनून से पिघले ।

वो इंतज़ार करता रह गया


वो इंतज़ार करता रह गया  ......... मेरे आने की चुपचाप से ,
मैं इस कश्म ~ ओ ~ कश में रह गई  ......... की वो कल रात का हवाला ना माँग बैठे ।

शायरी लिखने का मज़ा


शायरी लिखने का मज़ा  ......... किसी साथी के साथ में आता है ,
वरना तो शब्द भी रो पड़ते हैं  ...... तन्हाई से ख़फ़ा होकर ।

नहीं पढ़ना कोई और चैपटर


नहीं पढ़ना कोई और चैपटर  ....... सिर्फ इतनी किताब ही काफी है ,
इस अधूरे से इश्क़ की उमर तो देखो  ......... जितनी कम करो उतनी और अधिक भाती है ।